मज़ा क्या है?

यहाँ सबकी आने की एक वजह है,

यहाँ हर किसी की अपनी एक जगह है।

अगर ज़मीं ना हो तो आसमां देखने में,

मज़ा क्या है।।

अगर मुश्किलें ना हो तो सफलता पाने में,

मज़ा कया है।।

वो रात का अँधेरा ना हो,

तो दिन का उजाला कैसे भाएगा।

ज़िन्दगी में बिना उतार – चढ़ाव के,

कोई कैसे रह पाएगा।

सिर्फ मुस्कुराना नहीं रोना भी ज़रूरी है,

क्योंकि बिना उदास हुए,

कोई ख़ुशी का मोल कैसे समझ पाएगा।

अगर गलत ना हो कुछ तो सही का महत्व क्या है।

अगर एक जैसे हो जाएँ सब तो तुम में अलग क्या है।

बदलाव के बिना ये दुनिया बेरंग हो जाएगी,

और ऐसे जीने में,

मज़ा क्या है।।

इसलिए यहाँ सबकी आने की एक वजह है।

यहाँ हर किसी की अपनी एक जगह है।

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10 thoughts on “मज़ा क्या है?

  1. khubsurat kavita….parivartan sansaar ka niyam hai….kisi par apni raay thopna galat hai……
    अगर मुश्किलें ना हो तो सफलता पाने में,
    मज़ा कया है।।
    अगर एक जैसे हो जाएँ सब तो तुम में अलग क्या है।

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  2. Dear madam,

    Sorry for late comment 😉
    I just loved this poem , concept and your thought ….its beautiful ………but
    First two lines are truly truly amazing, relatable and fantastic.
    Keep writing 🙊🤭😎😉

    Liked by 1 person

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